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एसआईटी ने खंगाला पूरा शहर, शराब कांड का मुख्य आरोपी यूनुस गिरफ्तार, रासुका भी लगाई

कांड के गुर्गे सिंकदर और गब्बर फरार, दोनों पर 10-10 हजार का इनाम घोषित

केमिकलयुक्त शराब पीने से मजूदरों की मौत की जांच एसआईटी ने शुक्रवार को शुरू कर दी। गृहसचिव की अध्यक्षता में आई एसआईटी ने पूरा शहर खंगाला डाला। एसआईटी ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से चर्चा की और अब तक की स्थिति जानी। एसआईटी ने गोपाल मंदिर स्थित पुराना निगम कार्यालय, छत्रीचौक, खाराकुआं, नृसिंह घाट का मुआयना किया। एसआईटी आम आदमी से शनिवार को बात करेगी। इसके लिए दोपहर 12 से 1 बजे तक का समय मुकर्रर किया है। कोई भी व्यक्ति सर्किट हाउस पर एसआईटी को जानकारी दे सकता है। उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।

– स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने एसआईटी के सामने दावा किया कि केमिकल युक्त शराब बनाने की अवैध फैक्ट्री छत्रीचौक स्थित पुराने नगरनिगम कार्यालय की छत पर चल रही थी। यूसुफ की सरपरस्ती में अस्थायी निगमकर्मी सिंकदर एवं गब्बर यहां स्प्रिट से शराब तैयार कर रहे थे।40 रुपए कीमत के 400 एमएल स्प्रिट से वह 2 लीटर शराब बना रहे थे। इसे 200 एमएल की पोटली में पैक कर मजदूरों को सप्लाई कर रहे थे।
– पुलिस ने यूसुफ को गुरुवार रात ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि सिंकदर और गब्बर फरार हैँ। इन सभी पर रासुका लगाई गई है। सिंकदर और गब्बर पर पुलिस ने 10-10 हजार का इनाम घोषित किया है। सिंकदर ने अपने एक गुर्गे के नाम से छत्रीचौक पार्किंग का ठेका ले रखा है।
– एसआईटी चीफ डॉ राजेश राजौरा गुरुवार रात ही उज्जैन पहुंच गए थे। शुक्रवार को डॉ राजेश राजौरा ने एडीजीपी एसके झा और डीआईजी रतलाम उपरेंज सुशांत सक्सेना ने खाराकुआं, गोपाल मंदिर, रीगल टॉकीज, नृसिहंघाट और पुराने नगरनिगम कार्यालय का मुआयना किया। उन्होंने यहां रुककर एक एक चीज देखीं। मुआयने के बाद एसआईटी े पुलिस एवं प्रशासन के स्थानीय अधिकारियों से जानकारी ली। इसमें यह पूछा कि घटना की जानकारी कब लगी। मजदूरों की शिनाख्त कैसे की। परिजन इनकी मौत पर क्या बता रहे थे। पीएम रिपोर्ट में क्या निकला। अवैध शराब का काम कब से चल रहा था। इस पर क्या एक्शन लिया गया। यह कब-कब लिया गया।

– डॉ राजेश राजौरा ने मीडिया को बताया कि डीनेचर स्प्रिरिट के आरएस 137 लॉट में दिक्कत है। इसके उपयोग रोकने की सलाह जारी की है। अब तक 12 मौते हुई हैँ।
गुरुवार से शुरू हुई उज्जैन पुलिस, आबकारी अमले और प्रशासन का अवैध शराब को छेड़ा अभियान शुक्रवार को भी जारी रहा। तीनों विभाग एक्शन के मूड में रहे। कमोवेश हर थाना क्षेत्र में शराब का अवैध कारोबार करने वालों की धरपकड़ शुरू हुई। इसी के साथ केसों का बनना शुरू हुआ। धड़ाधड़ केस दर्ज किए जाते रहे। शुक्रवार सुबह तक यह आंकड़ा 104 पर पहुंच गया था।
– इधर देर रात नगरनिगम और प्रशासन की टीम सड़कों पर जांच करने के लिए कूद पड़ी। शहर में घूम-घूमकरर फुटपाथ पर सोए लोगों से पूछताछ की गई। शहर के बाहर के रहने वालों को निगम के वाहन में बैठाकर रैनबसेरों में भेजा गया। शहर के भीतर रहने वालों को उनके घर की तरफ खिसकाया गया। नशे में मिले लोगों को अस्पताल भेजा गया।
सवालों के घेरे में खाराकुआं थाना, 300 मीटर दूर पर ही बिकती रही मौत, कार्रवाई क्यों नहीं हुई
केमिकल युक्त शराब के मामले ने खाराकुआं थाने को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। इसकी वजह यह है कि शहर के बगैर काम वाले इस थाने से महज 300 मीटर दूर जिंजर बनकर 20-20 रुपए में मौत बिकती रही और एक भी पुलिसकर्मी को इसका पता नहीं चला।
यूनुस, उसका दामाद सिकंदर और गब्बर 15 सालों से क्षेत्र में सक्रिय है। इन पर सट्टा चलाने, अवैध शराब बेचने और अन्य अवैधानिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। यह नगरनिगम की आड़ में बखूबी अपनी काली करतूतों को अंजाम दे रहे थे और इसकी भनक ना तो उनके अधिकारियों को मिली और ना ही पुलिस वालों को। गोपाल मंदिर स्थित पुराने निगम कार्यालय भवन के खंडहर से खाराकुआं थाना महज 300 मीटर की दूरी पर है, लेकिन इधर झांकने कोई नहीं आया। या यूं कहें कि किसी ने झांकने की जरूरत नहीं समझी। इसके कईं कारण हो सकते हैं। यूनुस, सिंकदर के प्रभाव से ज्यादा यह अवैध कमाई में हिस्सेदारी का मामला हो सकता है। छत्री चौक सराय में मजदूरी करने वालों से लेकर यहां के दुकानदारों तक को यह मालूम था कि बगीचे के अंदर से ही पोटली की शराब बेची जाती है लेकिन पुलिस को यह पता नहीं चला। खाराकुआं उज्जैन शहर का सबसे छोटा थाना है। इसका क्षेत्र भी बहुत छोटा है। हां इसके इलाके में बड़ा व्यवसायिक इलाका जरूर आता है। यहां की तंग बस्तियों में जुआ, सट्टा चलना आम बात हैं, लेकिन शराब तस्करी का कांड पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सामने आया है।

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