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गुंडों के लिए आतंक, नेताओ के लिए सिरदर्द और जनता के लिए आईडियल थे आईपीएस सचिन अतुलकर…. बोले बस इतनी ही सेवा कर सका महाकाल !

बड़े बड़े गुंडे- बदमाशों को किया नेस्तोनाबूत, नेताओं पर भी चल गया था चाबूक

उमेश चौहान

उज्जैन । आईपीएस सचिन अतुलकर का नाम उज्जैन के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा, अपने कार्यो और व्यवहार कुशलता से शहरवासियों के दिल में अपनी एक अलग इमेज बनाने वाले एसपी सचिन अतुलकर का तबादला भोपाल मुख्यालय में भले ही कर दिया हो लेकिन उनके द्वारा किये गए कार्य सालों याद रखे जाएंगे । महाकाल के परम भक्त रहे सचिन अतुलकर ने जाते जाते कहा कि बस इतनी ही सेवा कर सका महाकाल, बतादें की अतुलकर सावन की सभी सवारियों में पालकी के आगे आगे चलते थे और आईपीएस सब्मिट में भी उन्होंने बाबा महाकाल की स्तुति नृत्य के माध्यम से की थी ।

गुंडों का किया सफाया, किये कई बड़े ख़ुलासे …

गुर्जर गैंग , मुकेश भदाले ग्रुप, दुर्लभ कश्यप गैंग, सहित शहर के तमाम छोटे बड़े गुंडे बदमाशों को सचिन अतुलकर ने न केवल जिलाबदर, रासुका लगाकर जैल भेजा बल्कि उनके पुरे एम्पायर और सपोर्टरो को भी नेस्तोनाबूत कर दिया ताकि वे दुबारा शहर में फन नही उठा सके । ऑपरेशन पवित्र में 12 हजार बदमाशों पर कार्यवाही की गई, वहीं गुर्जर गैंग के रौनक गुर्जर, रोशन गुर्जर और 60 हजार के ईनामी बदमाशों काऊ, सोहन और करण का एनकाउंटर भी किया गया ।
अतुलकर के कार्यकाल में सर्वाधिक पत्रकार वार्ताएं होने का भी रिकार्ड बना जिनमें कई बड़े बड़े खुलासे और अंधे कत्लों का भी पर्दाफाश हुआ जिसके कारण वे शहर के नए सिंघम के रूप में उभर गए ।
सचिन अतुलकर जितने दबंग थे उतने ही व्यावहारिक और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी भी रहे, जिनसे उनकी मित्रता या व्यवहार रहे वो इस बात को अच्छे से समझ सकते है । अतुलकर ने न सिर्फ गुंडे बदमाशो पर बल्कि बेलगाम पुलिसवालों पर भी लगाम लगाई यही वजह रही कि कई पुलिस अधिकारी उनके जिले में पोस्टिंग से डरते थे तो कई अपना ट्रांसफर दूसरे जिले में कराकर चले गए । आलम यह भी रहा कि थानों पर टीआई की जगह पीएसओ ने भी लंबे समय तक प्रभार संभाला लेकिन उन्होंने कभी टीआई की कमी भी लोगो को महसूस नही होने दी क्योंकि अधिकांश मामलों में लोग उनसे सीधा मिलकर शिकायतें कर देते थे और वे भी उस पर तत्काल एक्शन ले लेते थे जिससे जनता में उनकी छवि बेहद साफ और स्वच्छ अधिकारी के रूप में बनी ।

तगड़ी है फेन फॉलोइंग ..
एसपी सचिन अतुलकर का जब प्रमोशन हुआ तो सभी को लगा था कि अब उनका ट्रांसफर तय है लेकिन उनकी लोकप्रियता के चलते कांग्रेस सरकार ने उन्हें यहीं एसएसपी बना दिया । अतुलकर की फैन फॉलोइंग इतनी तगड़ी रही है कि सोशल मीडिया हो या शहर सभी उनसे बात करने, मिलने, देखने और फोटो खिंचवाने को आतूर रहते है, उनकी दीवानगी युवतियों में अधिक देखी गई, पंजाब की एक लड़की तो घर छोड़कर उज्जैन आ गई थी जिसे जैसे तैसे पुनः घर भेजा गया, इसके कारण अतुलकर ने युवतियों से भेंट करना भी बंद कर दिया था, उनके fb, ट्विटर, इंस्टाग्राम पर सेंकडो अकाउंट है जो उनके प्रशंषको द्वारा ऑपरेट किये जाते है , एक हजार से अधिक fb अकाउंट तो वे बंद भी करा चुके थे लेकिन लोग फिर भी उनके नाम से अकाउंट बनाकर चला रहे है, जिनसे लाखों लोग जुड़े है । अतुलकर ने स्वयं यह बात बताई की लोग उनके फेक अकाउंट बनाकर चला रहे है जबकि उनका fb पर सिर्फ एक ही पेज है वहीं ट्विटर पर उनके लाखों फ़ॉलोअर है जिसे देखकर स्वयं सलमान खान ने उन्हें बिग बॉस के लिए ऑफर किया था लेकिन अतुलकर ने ऑफर को अस्वीकार कर दिया । अतुलकर न सिर्फ समर्थकों और जनता बल्कि मीडिया के भी बेहद प्रिय अधिकारी रहे लगभग सभी पत्रकारों से उनका व्यक्तिगत परिचय और व्यवहार था, मीडिया फ्रेंडली होने के कारण शहर के मीडिया ने भी उन्हें सिर आंखों पर बैठाया और उनकी कुछ खामियों को भी खूबियों में बदल दिया,उन्होंने भी सभी मीडियाकर्मियों का हमेशा मान सम्मान रखा किसी को अकारण परेशान नही किया और न ही कोई झूठे प्रकरण किसी पर लादे जैसा अमूमन अधिकारी दबाव में करते है ।

नेताओ पर कार्यवाही बनी वजह …
एसपी सचिन अतुलकर की पोस्टिंग भाजपा सरकार ने ही उज्जैन में की थी, किंतु शुरुआत से ही वे किसी भाजपा नेता को रास नही आये,आलम यह रहा कि मंत्री पारस जैन, विधायक यादव और सांसद चिंतामणि मालवीय कई बार अतुलकर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे लेकिन अतुलकर ने किसी की परवाह नही पाली, विधानसभा चुनाव के दौरान पुलिसकर्मी को अपशब्द कहने पर अतुलकर ने सांसद चिंतामणि पर भी प्रकरण दर्ज कर दिया जिससे पुरी भाजपा बोखला गई यही वजह रही कि कांग्रेस सरकार भी उन्हें पसंद करने लगी और इतने तबादलों के बीच भी अतुलकर का तबादला उज्जैन से नही किया गया, कांग्रेस सरकार में अतुलकर ने fb पोस्ट और अन्य विवादों को लेकर दर्जनभर से अधिक भाजपाइयों पर रासुका सहित अन्य कार्यवाहियां कर दी थी जिसके कारण अतुलकर भाजपा के टारगेट पर चल रहे थे और एकाएक बदले प्रदेश के समीकरणों के बाद अतुलकर ने भी अपना बोरिया बिस्तर बांध लिया था लेकिन कोरोना महामारी ने उन्हें कुछ वक्त और दिया और वे इस वक्त में भी जनता की भरपुर सेवा करते नजर आए , कोरेण्टाइन क्षेत्रों से लेकर आरडी गार्डी और पीटीएस सभी जगह अतुलकर ने कलेक्टर शशांक मिश्र के साथ सतत दौरे किये, शहर की कानून व्यवस्था भी सुद्रढ़ रखी, चूंकि शहर में डंडे बरसाने का आदेश नही था लिहाजा लॉक डाउन का उतनी कढाई से पालन नही हो सका फिर भी अतुलकर ने बार बार लोगो से fb और सोशल मीडिया, पत्रकारों के माध्यम से घरो में रहने और लॉक डाउन का पालन करने की अपील की और लोगो ने उनकी अपील को माना भी, लेकिन डॉक्टर महानिक पर कार्यवाही न करने को लेकर उन पर जनता का काफी दबाव बन रहा था और कार्यवाही करने पर वे भाजपा नेताओं की नजरों में चढ़ रहे थे, महानिक के कारण वे काफी दिनों से जनता और सरकार के बीच पीस रहे थे अंततः सरकार को लग रहा था कि अतुलकर जनता के दबाव में महानिक पर प्रकरण दर्ज कर लेंगे जो कुछ नेताओं को रास नही आ रहा था लिहाजा उन्होंने ताबड़तोड़ कलेक्टर के बाद एसपी का भी तबादला करवा दिया ताकि महानिक को कुछ और राहत मिल जाये । हालांकि असमय और अकारण हुई इस विदाई से शहरवासियों में आक्रोश है, आदेश आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर आदेश पर सवाल खड़े किए जा रहे है वहीं सरकार को भी आड़े हाथों लिया जा रहा है । खैर सरकारी अधिकारी का तबादला कोई बड़ा विषय नही है लेकिन बड़ी बात यह है कि सचिन अतुलकर के साथ भी वही हुआ जो सचिन तेंदुलकर के साथ किया गया था उन्हें उनकी इच्छा अनुसार सम्मानजनक विदाई नही दी गई और यह टीस जितनी अतुलकर के मन में होगी उतनी ही उनके समर्थकों, मित्रों और शहरवासियों के मन में भी रहेगी ।

But We salute atulkar????????

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