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बागियों और भितरघातियों पर मेहरबानी तो “गुड्डू” से क्या परेशानी !

गुड्डू ने नही दिया धोखा, किया सामने से मुकाबला ..

उज्जैन । कांग्रेस पार्टी अभी उसके लिए गए निर्णयों और कि गई नियुक्तियों के कारण विवादों में है, एक के बाद एक भितरघातियों और बागियों को बांटे जा रहे पदों के कारण निष्ठावान कार्यकर्ताओ में असंतोष पनप रहा है, कार्यकर्ता पार्टी आलाकमान तक भी संदेश भेज रहे है और मीडिया, सोशल मीडया पर भी अपनी भड़ास निकाल रहे है लेकिन नतीजा सिफर ही दिखाई दे रहा है, बुधवार को भी कार्यकर्ताओ ने प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अपनी पीड़ा और आपत्ति दर्ज कराई है जिन्हें बाबरिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से बात करने का आश्वासन दिया है । हालही में हुई दरबार और पुर्व पैसे लेकर की गई एक जिलास्तरीय भितरघाती की नियुक्ति को लेकर पार्टी में अंतर्कलह उतपन्न हो गया है ।

लेकिन इन सबके बीच एक बात बड़ी तेजी से कही जा रही है कि अगर बागीयो और भितरघातियों पर इतनी मेहरबानी है तो फिर आखिर पार्टी को गुड्डू से क्या परेशानी है, क्योंकि गुड्डू ने इन घुसपैठियों की तरह पार्टी में रहकर तो पीठ में खंजर नही मारा और न ही किसी कांग्रेस प्रत्याशी को हराने के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ा । गुड्डू ने तो अपनी उपेक्षा से नाराज होकर दल बदलकर मर्दों की तरह चुनाव लड़ा और भाजपा में जाकर भी कड़ा मुकाबला किया । गुड्डू ने न तो किसी कांग्रेसी को हराने की सुपारी ली और न किसी के साथ रहकर उससे गद्दारी की, गुड्डू ने सांसद रहते भी कांग्रेस को दमदारी के साथ चलाया और हारने के बाद भी उसमें दम भरते रहे , गुडुड के रहते किसी कांग्रेस नेता की भितरघात करने की हिम्मत भी नही थी और जो लोग आज के सिकंदर बन रहे है वे भी सुदसामल में रहते थे । प्रेमचंद गुड्डू ने उज्जैन को न तो अपने व्यवसाय का केंद्र बनाया और न कभी किसी से ट्रांसफर और अन्य कार्यो की दलाली खाई और न किसी से चंदा मांगा । कुलमिलाकर पुर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने कांग्रेस पार्टी की साख कभी शहर और समाज में धूमिल नही होने दी जिसके कारण आज उनके लोकसभा क्षेत्र में 5 कांग्रेस के विधायक है सिर्फ पार्टी से सामंजस्य खराब होने के कारण ही गुड्डू ने दल बदला जो कई वरिष्ठ नेता भी कर चुके है और कोई भी पार्टी इसे गद्दारी या भितरघाती की श्रेणी में नही गिनती है । जब कांग्रेस में सभी बागियों और भितरघातियों को गले लगाया ही जा रहा है तो फिर आखिर गुड्डू ने ऐसा कौन सा गुनाह किया है, यह सवाल आज सभी की जुबां पर है ।

ब्युरो रिपोर्ट, उज्जैन

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