मध्य प्रदेश

Opinion: नकुल नाथ की दावेदारी से कमलनाथ की राह आसान हो पाएगी या बढ़ेगी चुनौती ?

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Opinion: नकुल नाथ की दावेदारी से कमलनाथ की राह आसान हो पाएगी या बढ़ेगी चुनौती ?

MP: विधानसभा उप चुनाव में कमलनाथ के लिए नकुल नाथ के हाथों में युवाओं की कमान देना आसान नहीं है

दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) के पुत्र जयवर्द्धन सिंह को कमलनाथ (Kamalnath) ने अपने मंत्रिमंडल में सीधे कैबिनेट मंत्री के रूप में जगह दी थी. कमलनाथ अब चाहेंगे कि दिग्विजय सिंह भी नकुल नाथ (Nakul Nath) को युवा नेता के तौर पर स्थापित करने में मदद करें !

भोपाल. छिंदवाड़ा के सांसद नकुल नाथ (Nakul Nath) द्वारा प्रदेश में युवाओं के नेतृत्व पर अपनी दावेदारी ठोके जाने से उन नेताओं के हाशिये पर जाने की संभावना बढ़ गई है, जो बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी का नेतृत्व अपने हाथ में लेने के लिए बेताब दिख रहे थे. पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ (Kamalnath) के लिए नकुल नाथ के हाथों में युवाओं की कमान देना आसान नहीं है. लेकिन वे यह भी नहीं चाहते कि नकुल नाथ अपने समकालीन नेताओं से पिछड़ जाएं.

कमलनाथ को पहली चुनौती दिग्विजय सिंह से मिल सकती है
कमलनाथ के मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनने से पहले तक नकुल नाथ के चेहरे की पहचान छिंदवाड़ा के बाहर नहीं है. कमलनाथ अप्रैल 2018 में जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Congress committee) के अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण करने के लिए भोपाल आए थे. उस वक्त आयोजित कार्यक्रम में मंच पर एक कुर्सी नकुल नाथ के लिए भी लगाई गई थी. संकेत स्पष्ट थे, कमलनाथ राज्य के मुख्यमंत्री बने तो नकुल नाथ लोकसभा का चुनाव लड़े. वर्तमान में प्रदेश के वे अकेले कांग्रेसी सांसद हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के अचानक कांग्रेस पार्टी छोड़कर जाने से राज्य की राजनीति पूरी तरह से बदल गई है. कांग्रेस के गुटीय समीकरण भी पूरी तरह से बदल गए हैं. चार दशक से भी अधिक समय से कांग्रेस में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह, सिंधिया विरोध की राजनीति करते हुए अपना वर्चस्व कायम रखे हुए हैं. अब ये दोनों नेता अपने-अपने बेटों के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं. इससे दोनों के बीच टकराव बढ़ सकता है. दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्द्धन सिंह को कमलनाथ ने अपने मंत्रिमंडल में सीधे कैबिनेट मंत्री के रूप में जगह दी थी. कमलनाथ अब चाहेंगे कि दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) भी नकुल नाथ को युवा नेता के तौर पर स्थापित करने में मदद करें !

कांग्रेस के दूसरी पंक्ति के नेताओं में असंतोष बढ़ने का खतरामध्य प्रदेश कांग्रेस में दूसरी पंक्ति में दर्जन भर से अधिक नेता ऐसे हैं जो पिछले कुछ सालों से पहली पंक्ति में आकर पार्टी का नेतृत्व करने की अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. अरूण यादव (Arun Yadav) को चार साल तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष और केन्द्र में राज्य मंत्री बनाकर एक मौका दिया जा चुका है. उनके भाई सचिन यादव कृषि मंत्री रह चुके हैं. ये दोनों ही राजनीतिक विरासत के दम पर राजनीति कर रहे हैं. जीतू पटवारी,उमंग सिंघार,कमलेश्वर पटेल जैसे चेहरे किसी न किसी रूप में राहुल गांधी की टीम के सदस्य रह चुके हैं. जीतू पटवारी मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. प्रदेश कांग्रेस के चार कार्यकारी अध्यक्षों में से एक हैं. कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं इन्हें युवा नेतृत्व का अनुभव भी है. नकुल नाथ और जीतू पटवारी दोनों ही उम्र के लिहाज से युवा नहीं माने जा सकते. जीतू पटवारी पटवारी 47 साल के हैं और नकुल नाथ की उम्र 46 साल है. नकुल नाथ की दावेदारी से जीतू पटवारी पिछड़ जाएंगे. राज्य में नकुल नाथ का कोई व्यापक संपर्क भी नहीं है. राजनीतिक अनुभव की भी कमी है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ यदि अपने बेटे को आगे बढ़ाते हैं, तो भाजपा को कांग्रेस के युवा नेताओं के बीच असंतोष पैदा करने में और आसानी होगी.

समर्थकों के जरिए दावेदारी को चुनौती दे रहे हैं जीतू पटवारी
नकुल नाथ ने जिस तरह से युवा नेतृत्व पर अपनी दावेदारी ठोकी है, उसी तरह जीतू पटवारी ने अपने समर्थकों के जरिए जवाब दिया. ट्वीटर पर नारे-पोस्टर की बाढ़ आ गई. जीतू पटवारी की मुहिम 27 जुलाई को ट्वीटर पर नंबर दो पर ट्रेंड कर रही थी. पटवारी के समर्थकों ने उन्हें राहुल गांधी का आज्ञाकारी भी बताया. जीतू पटवारी का असर मालवा अंचल में है. वे प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी भी हैं. युवाओं की दावेदारी को लेकर नकुल नाथ की तरह अब तक पटवारी खुलकर सामने नहीं आए हैं.

उप चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है युवा नेतृत्व का विवाद!
मार्च से लेकर अब तक 25 विधायक कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं. युवा नेतृत्व पर नकुल नाथ की दावेदारी से भाजपा खुश दिखाई दे रही है. राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा कहते हैं कि नकुल नाथ युवाओं का और कमलनाथ बुर्जुगों का नेतृत्व करेंगे, बढ़िया है बाकी नेता अनाथ हैं. मिश्रा की टिप्पणी का जवाब नकुल नाथ ने ट्वीटर पर एक नारे के जरिए दिया. नकुल ने लिखा अनाथ प्रदेश को नाथ चाहिए, कमल नहीं कमलनाथ चाहिए. यह नारा कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव भी उपयोग किया था. बता दें कि राज्य में 27 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव होना है. नकुल नाथ इन विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में युवा नेतृत्व के तौर पर प्रचार करना चाहते हैं. नकुल नाथ ने कहा कि कमलनाथ कैबिनेट में जो युवा मंत्री थे वे मेरे साथ रहेंगे. नकुल नाथ के इस बयान के बाद ही कांग्रेस की राजनीति में उबाल आना शुरू हुआ. नकुल नाथ के जो होर्डिंग भोपाल में लगे, उसमें जयवर्द्धन सिंह की दावेदारी का उपहास उड़ाया गया. होर्डिंग पर लिखा था-मध्य प्रदेश का भावी मुख्यमंत्री कोई पोस्टर लगाने से नहीं बन जाता, नकुल नाथ जैसी नेतृत्व क्षमता होना जरूरी. बता दें कि भोपाल में कुछ दिनों पहले प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के तौर जयवर्द्धन सिंह के होर्डिंग लगे थे. नकुल नाथ ने अपने नेतृत्व को साबित करने के लिए ट्वीटर पर अभियान चलाया. 25 जुलाई को नकुल नाथ सीएम फॉर एमपी ट्वीटर पर दूसरे नंबर ट्रेंड करने लगा था.

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मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावेदारी से कमलनाथ समर्थक भी हैरान
जहां उप चुनाव होना है, उनमें 16 विधानसभा क्षेत्र ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया इस अंचल में बड़ा चेहरा हैं. उप चुनाव में सिंधिया के मुकाबले नकुल नाथ के सामने चुनौतियां ज्यादा होंगी. कमलनाथ को सामने खड़ा रहना पड़ेगा. बात केवल युवा नेतृत्व की होती तो शायद पचास की उम्र पार कर चुके कांग्रेसी नकुल नाथ के साथ खड़े हो जाते. नकुल नाथ ने मुख्यमंत्री पद पर भी अपनी दावेदारी अभी से जता दी है. इससे दिग्विजय सिंह ही नहीं कमलनाथ समर्थक भी हतप्रभ हैं. एक वरिष्ठ विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पंद्रह साल बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी से कुछ उम्मीद बंधी थी, लेकिन पंद्रह माह में ही विपक्ष में बैठना पड़ा. अब परिवार वाद से लड़ना पड़ेगा. भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि कांग्रेस की सोच ही परिवार से शुरू होकर परिवार पर खत्म होती है.



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