मध्य प्रदेश

MP : ड्यूटी में मुस्तैद पुलिस जवान, अपना सर्विस रिकॉर्ड अपडेट करने में फिसड्डी

जो दस्तावेज सर्विस रिकॉर्ड बुक में होना चाहिए वह नहीं है या फिर अधूरे हैं

मध्यप्रदेश (mp) में करीब डेढ़ लाख पुलिस कर्मचारी हैं. इनमें कांस्टेबल से लेकर आईपीएस अधिकारी तक शामिल हैं. इन सभी का रिकॉर्ड पुलिस मुख्यालय (PHQ) की प्रशासन शाखा में रहता है

भोपाल.मध्य प्रदेश (madhya pradesh) में पुलिस का सर्विस रिकॉर्ड मेंटेन नहीं है. ये गड़बड़ी प्रशासन शाखा की ओर से नहीं की गयी है बल्कि पुलिस स्टाफ लापरवाह बना हुआ है. वो सर्विस रिकॉर्ड (service book) में अपनी और अपने परिवार की ज़रूरी जानकारी अपडेट नहीं कर रहा है.  प्रशासन शाखा की पड़ताल में जब पता चला कि कई पुलिस अधिकारी कर्मचारियों का सर्विस रिकॉर्ड अधूरा है, तब सभी पुलिस इकाइयों को मेल भेजकर दस्तावेज मांगे गए हैं.

सर्विस रिकॉर्ड अधूरा
पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा के एडीजी अन्वेष मंगलम ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों को सर्विस रिकॉर्ड के संबंध में पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि अनहोनी घटना में पुलिस स्टाफ के कुछ लोगों की मृत्यु के बाद यह जानकारी में आया है कि सर्विस रिकॉर्ड का पहला पेज लेमिनेशन, शादीशुदा कर्मचारी का सपत्नी फोटो, नॉमिनेशन फॉर्म, जन्मतिथि, वर्तमान पता, स्थाई गृह जिला आदि महत्वपूर्ण जानकारी नहीं भरी गयी है. उन्होंने पत्र में आगे लिखा कि इसी कारण सभी अधिकारी कर्मचारी और उनके परिवारों को अनहोनी की स्थिति में दिक्कत होती है. इसलिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसमें 15 दिन के अंदर सर्विस रिपोर्ट में जो कमियां हैं उन्हें अपडेट किया जाएगा. सभी पुलिस इकाई से कहा गया है कि वो अपने स्टाफ का अपडेट डाटा ईमेल से फौरन भेजें.

परिवार परेशान
मध्यप्रदेश में करीब डेढ़ लाख पुलिसकर्मचारी हैं. इनमें कांस्टेबल से लेकर आईपीएस अधिकारी तक शामिल हैं. इन सभी का रिकॉर्ड पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा में रहता है.प्रशासन शाखा ये रिकॉर्ड मेंटेन करती है. हाल ही में कुछ ऐसे मामले आए जिनमें पुलिस स्टाफ के साथ अनहोनी होने पर जब उनका रिकॉर्ड निकाला गया तो वो अधूरा था. ऐसे में उनका जीपीएफ और ग्रेच्यूटी का भुगतान लेने के लिए परिवार को परेशान होना पड़ा. प्रशासन शाखा ने जब पूरा रिकॉर्ड खंगाला तब पता चला कि करीब डेढ़ लाख स्टाफ का डाटा अपडेट नहीं है. जो दस्तावेज सर्विस रिकॉर्ड बुक में होना चाहिए वह नहीं है या फिर अधूरे हैं. ये गड़बड़ी पता चलने के बाद प्रशासन शाखा सक्रिय हुई और उसने मेल भेजा.




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