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शोएब अख्तर ने किया खुलासा, इस तरह की हार्ड ट्रेनिंग से वो फेंक पाए 160 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंद

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Shoaib Akhtar

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज व रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर शोएब अख्तर इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने बेबाक बयान से छाए रहते हैं। इस कड़ी में उन्होंने अब टीम इंडिया के खिलाड़ी हरभजन सिंह और युवराज सिंह के साथ अपनी दोस्ती के किस्से को शेयर किया है। जिसमें उन्होने अपनी घातक गेंदबाजी से युवराज और हरभजन के साथ राईवेलिरी ( प्रतिद्वंदिता ) के बारे में बताया है। 

बीबीसी के पॉडकास्ट में अख्तर ने भारतीय खिलाड़ीयों के साथ हुई झड़प की एक घटना को याद करते हुए कहा, “मैं लड़ाई नहीं करता, यह अन्य लोगों के प्रति अपना प्रेम दिखाने का मेरा तरीका है और मैंने मूल रूप से लाइन पार की है। जब मुझे कोई पसंद आता है, तो मैं उन पर प्रहार करता हूं। ”

अख्तर ने आगे कहा, “मैंने युवराज की पीठ तोड़ी है, जबकि इससे पहले शहीद अफरीदी को गले लगाकर उनके रिब्स को नुकसान पहुँचाया था। वहीं अब्दुल रज्जाक की हैमस्ट्रिंग मेरी वजह से काफी खिच गई थी। इस तरह ये मेरे प्यार करने का तरीका है जो थोडा लोगो को समझ में नहीं आता है। ये तब हुआ जब मैं अपने शुरूआती दिनों में थोडा पागल था और कभी अपनी शक्ति को समझ नहीं पाया।”

इससे पहले एक टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में अख्तर ने कहा, “हम चारो ओर घूम रहे थे और लड़ाई कर रहे थे। लेकिन कुल मिलाकर भज्जी ( हरभजन ) और युवराज मेरे छोटे भाई की तरह हैं। तो इस तरह उन्हें मारने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता है।”

इतना ही नहीं अख्तर ने साल 2003 में वर्ल्ड क्रिकेट की सबसे तेज 100 mph की रफ्तार से साउथ अफ्रीका के केप टाउन में गेंद फेंकने के किस्से को याद करते हुए कहा, “100 मील प्रति घंटे की बाधा को तोड़ना मेरे लिए बहुत बड़ी बात नहीं थी। यह सिर्फ मीडिया प्रचार था, एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भौकाल था। मुझे बस अपने शरीर के हर हिस्से से जोर लगाकर तेज गेंदबाजी करनी थी जिसे लिए मैंने ट्रेनिंग शुरू की थी और ऐसा करने में कामयाब रहा।”

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इतना ही नहीं अख्तर ने आगे अपनी ट्रेनिंग के बारे में बताते हुये कहा, “मैं 170 किलोग्राम वजन के साथ 100 मीटर की स्प्रिंट भागता था। जबकि 26 यार्ड दूर से मैं गेंदबाजी करता था और उस समय मेरे हाथ में कुछ न कुछ क्रिकेट गेंद से भारी चीजें होती थी। इस तरह जब मैं 22 यार्ड से गेंदबाजी करता था तो अपने आप गति 6 किलोमीटर/घंटा के आस-पास की रफ्तार से और बढ़ जाती थी।” 

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