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बुरी खबर! Coronavirus कर सकता है आपके कानों को खराब, जानें कैसे…

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जॉन हॉपकिंस स्कूल ऑफ मेडिसिन की ने कहा है कि इस रिसर्च के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) के लक्षण वाले लोगों में कान भी चेक किए जाएं.

वाशिंगटन. एक तरफ वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (Coronavirus) से वैसे ही पूरी दुनिया परेशान है. इसी बीच एक और बुरी और हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है. दरअसल, मेडिकल जर्नल जामा ओटोलरींगोलॉजी (JAMA Otolaryngology) के एक रिसर्च में पता चला है कि कोरोना वायरस सिर्फ नाक, गले और फेफड़े को ही नहीं, बल्कि कान को भी इन्फेक्ट कर सकता है और पीछे में उपस्थित हड्डी को भी.

मेडिकल जर्नल जामा ओटोलरींगोलॉजी में छपी इस स्टडी में तीन ऐसे मरीजों का जिक्र किया गया है, जिनकी कोरोना वयारस संक्रमण से मौत हो गई थी. इन तीन में से एक 60 साल के और दूसरा 80 साल के थे. इन दोनों मरीजों के कान के पीछे हड्डी में कोरोना इन्फेक्शन पाया गया है. जॉन हॉपकिंस स्कूल ऑफ मेडिसिन की ने कहा है कि इस रिसर्च के बाद कोरोना वायरस के लक्षण वाले लोगों में कान भी चेक किए जाएं. 80 साल की जो मरीज थी उसके केवल दाहिने कान के बीच में वायरस पाया गया था जबकि 60 साल वाले में शख्स के बाएं और दाए मास्टॉयड में और उसके बाएं और दाएं मध्य कान में वायरस था. बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं जब कान में कोरोना वायरस के संक्रमण की बात सामने आई है. हालांकि कुछ रोगियों में यह यह पाया गया कि संक्रमण के बाद उनके सूनन के क्षमता खराब हो गई थी. नए अध्ययन की टीम ने सिफारिश की है कि लोगों को मध्य कान की प्रक्रियाओं से गुजरने से पहले कान में कोरोना वायरस की जांच की जाए.

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जल्द से जल्द वैक्सीन तैयार की जा रही हैकोरोना वायरस की वैक्सीन जल्द तैयार करने के लिए दिग्गज कंपनियां, प्रतिष्ठित विद्यालय और सैन्य संस्थान जोरशोर से जुटे हैं. इनमें से आठ वैक्सीन हैं, जो वायरस पर अलग-अलग तरह से वार करती हैं. ये संस्थान कमजोर या निष्क्रिय वायरस, डीएनए या आरएनए विधि के जरिए टीका बना रही हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक है-शरीर में कोरोना का हमला होने पर उसे नष्ट करने की क्षमता पैदा करना.




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