मध्य प्रदेश

फर्जी डिग्री मामलाः जबलपुर हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के सामने खुल गई डॉक्टर की पोल

जबलपुर हाईकोर्ट में फर्जी डिग्री मामले में हुई सुनवाई.

जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) में फर्ज़ी और गलत तरीके से मरीजों इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई. सरकार ने कोर्ट में कहा- एक सप्ताह के भीतर पूरी रिपोर्ट दी जाएगी.

जबलपुर. फर्जी डिग्री के आधार पर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले डॉक्टरों के मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (High Court) में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस ने जब आरोपी डॉक्टर से उसकी डिग्री दिखाने को कहा, तो उसकी पोल खुल गई. जनहित याचिका में आपत्तिकर्ता बने आरोपी डॉक्टर ने बीएएमएस (BAMS) की जो डिग्री दिखाई, वह फर्जी निकली. इस पर चीफ जस्टिस (MP High COurt Chief Justice) ने खासी नाराजगी जताई और डॉक्टर को जारी अग्रिम जमानत निरस्त करने की बात कही. कोर्ट ने इसके बाद राज्य सरकार को ऐसे डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा एक सप्ताह में पेश करने का आदेश दिया.

आपको बता दें कि कोरोेना संकट काल के दौरान लगातार आ रही फर्जी डॉक्टरो की शिकायतों और गलत पद्धति सेे इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को ऐसे डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे.

इस कार्रवाई की जद में जबलपुर के डॉ. नीरज सिंह वर्मा भी शामिल थे, जिन्हें इस मामले में पहले अग्रिम जमानत मिल चुकी है. लेकिन आज हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जब एक डॉक्टर की डिग्री फर्जी निकली, तो उसके बाद हड़कंप मचा हुआ है. कोर्ट ने मामले में सरकार को भी आदेश दिया है कि वह ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा एक सप्ताह में पेश करे. सरकार ने भी स्पष्ट कहा है कि फर्जी और गलत पैथी से इलाज करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई लगभग पूरी हो गई है. जबलपुर उच्च न्यायालय को एक सप्ताह के भीतर सील बंद लिफाफे में प्रिंसिपल रजिस्टार के माध्यम से रिपोर्ट दे दी जाएगी. सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को मुकर्रर कर दी है.




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