उज्जैन न्यूज़क्राइम

पेढ़ी ने हड़पे इंजीनियर-डॉक्टर के रुपए

पेढ़ी में कराई थी एफडी, मेच्योर होने पर मिलनी थी राशि

बिजली वितरण कंपनी के एक डॉक्टर एवं एक इंजीनियर ने बिजली कर्मचारी परस्पर सहकारी संस्था मर्यादित में यह सोचकर अपनी गाढ़ी कमाई के रुपए जमा कराए थे कि यह वक्त-जरूरत काम आएंगे। लेकिन उनके इस भरोसे को सहकारी संस्था के अध्यक्ष और प्रबंधक ने तोड़ दिया। अब यह डॉक्टर और इंजीनियर अपने ही रुपए के लिए संस्था के चक्कर लगा रहे हैँ और बदले में उन्हे दुत्कार मिल रही है और अध्यक्ष से लेकर प्रबंधक तक धमका रहे हैं। वे अपनी फरियाद लेकर माधवनगर पुलिस के पास भी गए, आवेदन दिया कि साहब कार्रवाई कीजिए लेकिन 9 महीने बाद भी पुलिस ने कार्रवाई करना तो दूर कागज को उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। नतीजा आज तक यह लोग अपने ही रुपए को पाने के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं।

 यह मामला है आरक्षित वर्ग बिजली कर्मचारी परस्पर सहकारी संस्था मर्यादित उज्जैन का। यह संस्था बिजली वितरण कंपनी के कर्मचारियों को वित्तीय मजबूती देने के लिए बनाई थी। संस्था बिजली कर्मचारियों से मियादी जमा यानी फिक्स राशि डिपॉजिट करवाती है और उन्हें यह भरोसा देती है कि मियाद पूरी होने पर उन्हें उनके जमा कराए गए रुपयों पर 14 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ रुपए लौटाए जाएंगे। चूंकि 14 फीसदी का रिर्टन सरकारी बैंकें भी नहीं दे रही थीं सो इसी भरोसे में देसाई नगर में रहने वाले इंजीनियर शंकरलाल गोगेड 11 लाख और डॉक्टर डीएस राणा ने भी सात लाख रुपए जमा कराए थे। गोगेड को उम्मीद थी कि मेच्योरिटी पर उन्हें 11 लाख के साथ 8 लाख रुपए का ब्याज भी मिलेगा। लेकिन ऐसा तो हुआ नहीं उल्टा जो रुपए जमा थे वह भी नहीं मिले। इन्होंने मालूमात की तो पता चला कि पेढ़ी अध्यक्ष शेखर घोलपुरे और प्रबंधक विशंभरसिंह भदौरिया उनकी ही तरह ना जाने कितने लोगों को चूना लगा चुके हैँ। राणा ओर गोगेड पेढ़ी और घोलपुरे के चक्कर काट रहे है । पहले तो वह टालमटोल करता रहा। अब वह रुपए देने के बजाय विशंभर के साथ मिलकर दोनों को धमका रहा है। राणा ओर गोगेड अपना मामला लेकर 21 जनवरी को माधवनगर पुलिस थाने में भी पहुंचे। उन्होंने एसपी, आईजी से लेकर गृहमंत्री तक को आवेदन भेजे,उन्हें उम्मीद थी कि पुलिस कोई कार्रवाई करेगी लेकिन 9 महीने बाद भी पुलिस ने कार्रवाई तो करना दूर रहा आवेदन की तरफ झांककर भी नहीं देखा। गोगेड और राणा की तरह कईं पीड़ित ज्यादा ब्याज के लालच में चक्कर पेढ़ी के चक्कर काट रहे हैं और उन्हें भी इसी तरह या तो टाला जा रहा है या धमकाया जा रहा है।

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