विदेश

पाकिस्तान में चिकन के दाम 500 रुपए प्रति किलो तक पहुंचे, महंगाई ने बढ़ाई इमरान खान की चिंता

Image Source : DAWN.COM
पाकिस्तान में चिकन के दाम 500 रुपए प्रति किलो तक पहुंचे 

कराची: पाकिस्तान में चिकन की कीमत में आई अप्रत्याशित तेजी से कराची की अवाम परेशान है। पाकिस्तान के एआरवाई न्यूज के मुताबिक, कराची में चिकन की कीमतें आसमान छू रही हैं। कराची में चिकन की कीमतें कुछ ही दिनों में 500 पाकिस्तानी रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। सिंध की प्रांतीय राजधानी में चिकन की कीमत 50 रुपए से अधिक बढ़ गई है और 500 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।

पाकिस्तान में लगातार बढ़ रही महंगाई से प्रधानमंत्री इमरान खान की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। जहां एक ओर इमरान खान नया पाकिस्तान बनाने का नारा दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर बढ़ती महंगाई के कारण आम जनता को चिकन खाना भी मुश्किल होता जा रहा है। बता दें कि, पाकिस्तान में सब्जियों और पेट्रोल के दाम में पहले से आग लगी हुई है।

चिकन की कीमतों में वृद्धि को लेकर लोगों में है गुस्सा 

पाकिस्तान के कराची में चिकन की बढ़ती कीमतों को लेकर आम नागरिकों ने भी चिंता व्यक्त की है। लगातार मूल्य वृद्धि को लेकर उपभोक्ताओं ने मूल्य निगरानी समितियों के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कराची में जिंदा मुर्गे की कीमत 370 रुपए प्रति किलोग्राम और मीट की कीमत 500 रुपए तक पहुंच गई है। बड़ी संख्या में स्थानीय खरीदारों ने चिकन मीट की कीमतों में वृद्धि को लेकर गुस्सा जाहिर किया है। जबकि, लाहौर में चिकन मीट की कीमत 365 रुपए प्रति किलोग्राम बताई जा रही है।

जानिए क्यों बढ़ रहे चिकन के दाम

कराची के एक चिकन विक्रेता के मुताबिक, मुर्गे के मीट का दाम बढ़ने के पीछे चारा और कच्चे माल की कीमतों में बेहताशा बढ़ोत्तरी है। इससे पोल्ट्री के उत्पादों की लागत भी बढ़ी है। हमें अपने नुकसान की भरपाई करने के लिए मीट का दाम बढ़ाना पड़ रहा है। हालांकि, विक्रेता संघों ने बताया कि आने वाले दिनों में मीट की कीमत कम होगी। कई पोल्ट्री उत्पादक संगठन बाहर से माल मंगाने पर विचार कर रहे हैं।

मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में इमरान खान फेल

गौरतलब है कि, पिछले महीने प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश में बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) की बाजार समितियों को भंग कर दिया था। इमरान ने इस्लामाबाद में आवश्यक वस्तुओं के मूल्य नियंत्रण के संबंध में एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्णय लिया था। दरअसल, इन दोनों राज्यों से मिस गवर्नेंस और भ्रष्टाचार की खूब शिकायतें मिली थीं।




Source link

Tags

Related Articles

Back to top button
Close