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नौसेना की बढ़ेगी ताकत! भारत को जल्द मिलेगा ‘पनडुब्बियों का शिकारी’ MH-60 रोमियो हेलिकॉप्टर

भारत को जल्द मिलेगा रोमियो हेलिकॉप्टर

अमेरिका (US) ने भारतीय नौसेना (Indian Navy) को जल्द से जल्द MH-60-Romeo हेलिकॉप्टर की डिलिवरी देने का ऐलान कर दिया है. दक्षिणी चीन सागर (South China Sea) में बीजिंग की बढ़ती दखल के मद्देनज़र अमेरिका के लिए दक्षिण एशिया (South Asia) में भारत से ज्यादा भरोसेमंद पार्टनर कोई और नहीं है.

वाशिंगटन. भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव (India-China Border Dispute) के मद्देनज़र अमेरिका (US) ने भारतीय नौसेना (Indian Navy) को जल्द से जल्द MH-60-Romeo हेलिकॉप्टर की डिलिवरी देने का ऐलान कर दिया है. दक्षिणी चीन सागर (South China Sea) में बीजिंग की बढ़ती दखल के मद्देनज़र अमेरिका के लिए दक्षिण एशिया (South Asia) में भारत से ज्यादा भरोसेमंद पार्टनर कोई और नहीं है. इसी के मद्देनज़र अमेरिका सबमरीन का शिकार करने वाले अपने MH-60-R हेलिकॉप्टर की डिलिवरी 2021 की शुरुआत में ही कर सकता है.

हेलिकॉप्टर बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन के अधिकारी विलियम एल ब्लेयर ने द ट्रिब्यून को बताया है कि यह बिक्री विदेशी मिलिट्री सेल के जरिए हो रही है. अमेरिका डिलिवरी जल्द से जल्द देने पर काम कर रहा है. उन्होंने दावा किया है कि जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा और अगले साल की शुरुआत में डिलिवरी कर दी जाएगी. बता दें कि 24 हेलिकॉप्टरों की डील का ऐलान फरवरी में किया गया था. हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती सक्रिया के मद्देनजर यह डील सैन्यशक्ति के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है. ब्लेयर से जब यह सवाल किया गया कि क्या भारत को चीन के साथ बढ़ते तनाव की वजह से जल्दी डिलिवरी चाहिए, इस पर ब्लेयर ने कहा, ‘हमें भी जल्दी है. फरवरी में समझौता साइन हुआ था. यह डिलिवरी की रेकॉर्ड स्पीड होगी.’

कैसा है ‘रोमियो’ हेलीकॉप्टर?
लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित एमएच-60 रोमियो सी हॉक हेलीकॉप्टर पनडुब्बियों और पोतों पर अचूक निशाना साधने में सक्षम हैं. यह हेलीकॉप्टर समुद्र में तलाश एवं बचाव कार्यों में भी उपयोगी हैं. एमएच 60 रोमियो हेलीकॉप्टर दुश्मन के जंगी जहाजों को ट्रैक कर उनके हमलों को रोकने के लिए परिष्कृत लड़ाकू प्रणालियों- सेंसर, मिसाइल और टॉरपीडो से लैस हैं. रोमियो हेलीकॉप्टर अमेरिकी नौसेना में एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस वेपन के रूप में तैनात हैं. MH-60-R जैसा जंग लड़ने की क्षमता वाला ऐंटी-सबरमीन SONAR हेलिकॉप्टर सेना के लिए बेहद अहम है. भारत को ज्यादा इंजन, खास मिसाइलों और Mk-54 टॉरपीडो की जरूरत थी. ब्लेयर ने बतया है कि कंपनी F-16 फाइटर जेट्स की विंग असेंबली भी हैदराबाद शिफ्ट करना चाहती है.

रात में भी देख सकते हैं पायलट
ये हेलीकॉप्टर भारतीय रक्षा बलों को सतह रोधी और पनडुब्बी रोधी युद्ध मिशन को सफलता से अंजाम देने में सक्षम बनाएंगे. एमएच 60 हेलीकॉप्टर में दोहरा नियंत्रण प्रणाली मौजूद है. इसे उड़ाने के लिए दो पायलटों की जरूरत होती है. इसके कॉकपिट में बैठे पायलट रात के घने अंधेरे में भी अपने लक्ष्य को बखूबी देख सकते हैं. इस हेलीकॉप्टर में चार से पांच केबिन क्रू के साथ पांच यात्री भी बैठ सकते हैं. इसके केबिन की लंबाई 3.2 मीटर और चौड़ाई 1.8 मीटर और ऊंचाई 1.3 मीटर है.

आधुनिक हथियारों से हैं लैस
एमएच 60 रोमियो हेलीकॉप्टर कई अलग-अलग तरह के हथियारों से लैस हो सकता है. इसमें हथियारों को लगाने के लिए चार प्वाइंट्स दिए गए हैं. जिसमें लॉकहीड मार्टिन की एजीएम-114 हेलफायर एंटी-सरफेस मिसाइल लगाया जा सकता है. पनडुब्बियों को निशाना बनाने के लिए इसमें पनडुब्बीरोधी एकेटी एमके 50 या एमके 46 एक्टिव/पैसिव टॉरपीडो को लॉन्च कर सकता है. अपनी सुरक्षा के लिए इसमें 7.62 एमएम की मशीनगन को भी लगाया जा सकता है.

बता दें कि इन हेलीकॉप्टरों के भारतीय नौसेना में शामिल होते ही हिंद महासागर में चीनी नौसेना के बढ़ते दखल पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. इसके अलावा नौसेना की पुराने होते सी किंग हेलीकॉप्टर बेड़े को इससे मदद मिलेगी. रोमियो हेलीकॉप्टरों से भारतीय फौजों की एंटी-सरफेस (जमीन) और एंटी-सबमरीन सुरक्षा क्षमता में बढ़ोतरी होगी. एमएच 60 रोमियो हेलीकॉप्टर को अमेरिका के अलावा दुनिया भर की कई नौसेनाओं द्वारा प्रयोग किया जाता है. इनमें ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया, ट्यूनिशिया, कतर, सऊदी अरब, इस्राइल, मलयेशिया और मैक्सिको की नौसेना शामिल हैं.




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