मध्य प्रदेश

दिग्विजय सिंह का राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम पत्र, लिखा- हुजूर दल-बदल के दलदल से बचाएं

दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रपति से दल बदल कानून में प्रभावी संशोधन करने की जरूरत बताई है.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) से अनुरोध किया है कि लोकतांत्रिक परंपराओं को जीवंत रखने के लिए दल-बदल के मामलों में सख्त कानून (Strict Laws) बनाया जाए. दल-बदलू जनप्रतिनिधियों को 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से रोक लगाई जाए.

भोपाल. मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक में विधायकों के दल बदलने को लेकर परेशान कांग्रेस पार्टी (Congress) अब दल-बदल कानून में संशोधन (Amendment in Defection Law) की मांग कर रही है. इसको लेकर कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने मंगलवार को राष्ट्रपति (President of India) रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) को पत्र लिखा है. दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि देश में सत्ता को लेकर जनप्रतिनिधियों के दल बदलने का सिलसिला जारी है, जो कि लोकतंत्र को कुचलने वाला है. दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रपति से दल बदल कानून में प्रभावी संशोधन करने की जरूरत बताई है.

दिग्विजय सिंह का राष्ट्रपति के नाम पत्र
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में लिखा है, ‘जिस देश की लोकतांत्रिक परंपराएं एक वैभवशाली इतिहास रही है. भारतीय राजनीति के शीर्ष पुरूष के रूप में पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, जनसंघ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित अटल बिहारी वाजपेयी, कम्युनिस्ट पार्टी के  ईएमएस नंबूरीपाद, ज्योति बसु और अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल जैसे नेता हमेशा से परक राजनीति के पक्षधर रहे हैं.’

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दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, अरुणाचल, गोवा राज्यों का जिक्र किया है.(पीएम मोदी और राष्ट्रपति)

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, अरुणाचल, गोवा राज्यों का जिक्र किया है. दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि दलबदल की आग से झुलसने वाले राज्यों में यह सभी राज्य शामिल हैं, जो हमारे सामने दल-बदल मामले के सबसे ज्वलंत उदाहरण हैं.

1985 और 2003 में हुए संविधान संशोधन में बदलाव किया जाए
दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि दल-बदल के दलदल से बचाएं रखने के लिए जरूरी है कि 1985 और 2003 में हुए संविधान संशोधन में बदलाव किया जाए. दिग्विजय सिंह ने लोकतांत्रिक परंपराओं को जीवंत रखने के लिए दल-बदल के मामलों में सख्त कानून बनाए जाकर ऐसे दलबदलू जनप्रतिनिधियों को 6 साल के लिए किसी भी तरह के चुनाव लड़ने से रोक लगाने का अनुरोध किया है.

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दिग्विजय सिंह के मुताबिक गौरवशाली संसदीय व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए संविधान में संशोधन करना जरूरी है और इसके लिए सर्वदलीय बैठक बुलाकर बहल की जाना चाहिए ताकि विचार-विमर्श चर्चा और आम सहमति बनाकर संविधान में संशोधन किया जा सके.




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