मध्य प्रदेश

डॉ. अखिलेश गुमाश्ता: वो शख्स जिसने रामायण का अंग्रेजी अनुवाद कर ‘राम’ को बनाया वर्ल्ड फेमस!

डॉ. अखिलेश गुमाश्ता ने रामायण का अंग्रेजी अनुवाद किया.

रामायण (Ramayan) हर किसी के जहन में बैठ सके और उसे हर कोई समझ सके इस लिहाज से डाॅ. गुमाश्ता ने 2002 से रामायण के अंग्रेजी अनुवाद का काम शुरू किया था.

जबलपुर. अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Nirman) के लिए भूमि पूजन को लेकर जोश और जुनून लोगों में देखने मिल रहा है. बच्चों से लेकर बूढ़े तक हर किसी में राम मंदिर निर्माण की उत्सुकता नजर आ रही है. ये कहना है रामायण का अंग्रेजी अनुवाद करने वाले डॉ. अखिलेश गुमाश्ता (Dr. Akhilesh Gumashta) का. न्यूज़ 18 से खास बातचीत करते हुए डॉ. गुमाश्ता ने कहा कि भारत के आध्यात्मिक चिंतन को जागृत करने का स्थान आज पुनः स्थापित हो रहा है. अमूमन आज के दौर में कठिन और समझने में मुश्किल लगने वाली रामायण हर किसी के जहन में बैठ सके और उसे हर कोई समझ सके इस लिहाज से डाक्टर गुमाश्ता ने 2002 से रामायण की अंग्रेजी अनुवाद का काम शुरू किया था.

डॉ. गुमाश्ता का मानना है कि आज के दौर में बच्चे सही शब्दों में हिंदी की भाषा तक नहीं समझ पाते. ऐसे में कठिन लगने वाली रामायण को आसान बनाते हुए आने वाली पीढ़ी तक यह पहुंच सके, इस मकसद के साथ इसका अंग्रेजी अनुवाद किया गया. खास बात यह है कि इस अंग्रेजी अनुवाद में रामायण को पोयट्री के रूप में लिखा गया है. ताकि आसानी से भक्त इसे समझ सकें.

अब विश्व में पढ़ा जा सकता है रामायणडॉक्टर गुमाश्ता ने दावा किया कि जिन्हें अंग्रेजी आती है वह आसानी से इस ग्रंथ को पूरे विश्व में कहीं भी पढ़ सकते हैं. 8 साल की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किए गए इस अंग्रेजी ग्रंथ में राम की लीला और रामायण के हर किस्से का जिक्र किया गया है, जो रामचरितमानस में हमें पढ़ने को मिलता है. रामचरितमानस के दोहे सोरठे और छंद को इस अंग्रेजी अनुवाद वाले ग्रंथ में पूरी तरीके से प्रदर्शित करने की कोशिश की गई है, लेकिन इसका मूल रूप पोयट्री ही है. ताकि आसानी से कोई भी ऐसे समझ सकें.

कभी नहीं गए अयोध्या
डॉक्टर गुमास्ता के मुताबिक वे आज तक कभी अयोध्या नहीं गए हैं. क्योंकि जब भी उन्होंने किसी के सामने अयोध्या जाने का जिक्र किया तो हर किसी ने यही बताया कि आपको वहां के दृश्य को देखकर अतिरिक्त पीड़ा होगी. क्योंकि जो आपकी ईष्ट हैं वह बेघर होकर खुले आसमान में हैं. ऐसे में आज उस मानसिक गुलामी से भी आजादी मिलने का समय आ गया है. इस ऐतिहासिक पल के लिए सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया था वह सही मायने में आज संकल्प का रूप ले रहा है.
प्रतिक मोहन अवस्थी न्यूज़ 18 जबलपुर




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