मध्य प्रदेश

जबलपुर: फर्जी नियुक्त पत्र से खुद को बताया JDA अध्यक्ष, फरार ‘रंगरेज’ पर केस दर्ज

फरार आरोपी की तलाश पुलिस कर रही है.

जानकारी के मुताबिक, आरोपी फर्जी नियुक्ति पत्र (Fake Appointment Letter) दिखाकर जेडीए (JDA) अधिकारियों पर धौंस दिखा रहा था. आरोपी का नाम अब्दुल महमूद रंगरेज़ बताया जा रहा है. फर्जीवाड़े का पोल खुलने के बाद पुलिस (Police) ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है.

जबलपुर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर (Jabalpur) शहर में खुद को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त जेडीए अध्यक्ष बताने वाले शख्स पर पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज किया है. जानकारी के मुताबिक, आरोपी फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाकर जेडीए अधिकारियों पर धौंस दिखा रहा था. आरोपी का नाम अब्दुल महमूद रंगरेज़ बताया जा रहा है. फर्जीवाड़े का पोल खुलने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. फिलहाल, फरार आरोपी की तलाश की जा रही है.  बताया जा रहा है कि आरोपी अब्दुल महमूद रंगरेज द्वारा खुद को जबलपुर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बताते हुए मध्य प्रदेश शासन का फर्जी नियुक्ति पत्र भी प्राधिकरण में पेश किया गया था. शंका होने पर की गई शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई की.

दरअसल, जबलपुर के सराफा रोड फूटा ताल का रहने वाला अब्दुल महमूद रंगरेज द्वारा मध्य प्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग वल्लभ भवन भोपाल के 22 फरवरी 2020 का फर्जी नियुक्ति आदेश पत्र जबलपुर विकास प्राधिकरण में दिखा कर अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा था. शंका होने पर प्राधिकरण द्वारा राज्य सरकार से पत्राचार किया गया. इसके बाद 29 जून 2020 को शासन ने दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री के नियुक्ति पत्र को फर्जी बताया और प्राधिकरण को मामले में वैधानिक कार्रवाई करवाने के लिए निर्देशित किया था.

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तलाश में जुटी पुलिसशासन के आदेश पर मामले की शिकायत ओमती थाने में की गई. जांच के बाद पुलिस ने आरोपी अब्दुल महमूद रंगरेज द्वारा धोखाधड़ी करना पाया और उसके खिलाफ केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है. वहीं आरोपी अब्दुल महमूद रंगरेज अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा है जिसकी तलाश की जा रही है.

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कांग्रेस नेताओं से सामने आई करीबी

गौरतलब है कि आरोपी अब्दुल महमूद रंगरेज के फेसबुक अकाउंट पर विभिन्न कांग्रेस कार्यकर्ताओं नेताओं के साथ फोटो अपलोड किए गए हैं. ऐसे में उसके कांग्रेस पार्टी के गरीब की बातें कही जा रही है. ऐसे में सत्ता परिवर्तन के बाद 29 जून को भाजपा सरकार के द्वारा इस आदेश पत्र को फर्जी करार दिया गया है. ऐसे में अब पुलिस पूरे मामले की सभी बिंदुओं के साथ जांच में जुट गई है.




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