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कमला हैरिस का बचपन में अपने नाना के साथ चेन्नई तट पर सुबह टहलना आज कितना मायने रखता है?

(एस मित्रा कलिता)

नई दिल्ली. कमला हैरिस (Kamala Harris) के साथ बहुत से सर्वप्रथम जुड़े हैं. एक प्रमुख पार्टी के राष्ट्रपति पद के टिकट के लिए पहली अश्वेत महिला (Black woman) होने के अलावा, वह पहली भारतीय-अमेरिकी भी हैं. उनकी मां, श्यामला गोपालन, चेन्नई (Chennai) के बेसेंट नगर में पैदा हुईं और यूसी बर्कले में डॉक्टरेट कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अमेरिका (America) चली गईं थीं. बराक ओबामा की तरह, एक मिश्रित-नस्ल (mixed-race) की विरासत ने हैरिस की पहचान को कई नागरिकों और वोटिंग करने वाले समुदायों तक पहुंचने में मदद की है.

यह समझने के लिए कि इस समुदाय (community) के लिए यह घोषणा क्या मतलब रखती है, मैं भारतीय-अमेरिकियों और राजनीति (politics) पर सबसे अच्छे स्रोत अज़ीज़ हनीफा के पास पहुंची. हनीफा हमारे समुदाय एक नृजातीय समाचार पत्र (ethnic newspaper) ‘इंडिया अब्रॉड’ की कार्यकारी संपादक और मुख्य संवाददाता थे, जिसे कुछ महीनों पहले कोविड-19 (Covid-19) की मार के चलते बंद करना पड़ा.

डोनाल्ड ट्रंप की अप्रवासियों के प्रति नीतियों का शक्तिशाली जवाबउन्होंने मुझे 26 अगस्त, 2009 का एक इंटरव्यू भेजा. उन्होंने कमला हैरिस के साथ किये इस इंटरव्यू के अंशों को प्रस्तुत करने की अनुमति दी. इसकी हेडलाइन है: “कमला देवी हैरिस: ‘महिला ओबामा’ कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल पद के लिए उनके अभियान पर बातचीत”

यह लेख उनकी भारतीय पहचान की भूमिका पर प्रकाश डालता है, जो आने वाले महीनों में फिर से सामने आएगी. अप्रवासियों की बेटी के रूप में हैरिस का उदय- जो जमैका से हैं, भारत से हैं- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अप्रवासियों के प्रति बयानबाजी और नीतियों के लिए एक शक्तिशाली जवाब है.

अजीज हनीफा: संस्कृति और विरासत की बात करें तो आपकी मां ने आपको क्या दिया?
कमला हैरिस: मेरी मां को अपनी भारतीय विरासत पर बहुत गर्व था और उन्होंने हमें, मुझे और मेरी बहन माया को हमारी संस्कृति के बारे में गर्व करने की सीख दी. हम हर दो साल में भारत आते थे. मेरे जीवन में सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक, मेरी मां के अलावा, मेरे नाना पीवी गोपालन थे, जो दरअसल भारत में एक ऐसे पद पर थे, जो हमारे यहां राज्य के सचिव के पद की तरह था. मेरे नाना भारत में मूल स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, और बचपन से मेरी कुछ बेहतरीन यादें सेवानिवृत्त होने के बाद उनके साथ समुद्र तट पर टहलने की रही हैं. और बेसेंट नगर में रहते थे, जो तब के मद्रास में था.

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वे अपने दोस्तों के साथ हर सुबह समुद्र तट पर टहलते थे, जो सभी सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी थे और वे राजनीति के बारे में बात करते थे कि भ्रष्टाचार से कैसे लड़ा जाना चाहिए और न्याय के बारे में. वे हंसी-मजाक करते थे और राय और तर्क भी देते थे, और उन वार्तालापों, यहां तक ​​कि उनके कार्यों से मुझ पर इस तरह के एक मजबूत होने, जिम्मेदार होने, ईमानदार होने और सत्यनिष्ठ होने के संदर्भ में बहुत प्रभाव पड़ा. जब हम इसके बारे में सोचते हैं तो भारत दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है- इसलिए यह मेरी पृष्ठभूमि का हिस्सा है, और बिना किसी संदेह के मेरे आज पर और मैं जो हूं, उस पर इसका बहुत प्रभाव पड़ा है.




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