मध्य प्रदेश

आदिवासी दिवस पर MP उपचुनाव का असर, आधा दर्जन सीटें जीतने को कमलनाथ ने चला ये दांव

कांग्रेस पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने आदिवासी विधायकों के साथ वर्चुअल बैठक की.

World’s Indigenous Peoples Day पर आदिवासी विधायकों के साथ वर्चुअल मीटिंग में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) ने कहा- सत्ता में आए तो आदिवासी हित में फैसलों के साथ नौकरियों में देंगे प्राथमिकता.

भोपाल. विश्व आदिवासी दिवस (Indigenous Peoples Day) का अवसर भी मध्य प्रदेश में सियासी ही रहा. आदिवासी दिवस पर आदिवासियों को साधने के लिए कांग्रेस ने आज पहली बार पार्टी के आदिवासी विधायकों के साथ वर्चुअल बैठक की. इसमें आने वाले दिनों में होने वाले विधानसभा उपचुनाव (MP Bypolls) का असर साफ दिखा. इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ (Kamalnath) ने आदिवासी विधायकों के साथ विभिन्न मुद्दों पर लंबा मंथन किया. कमलनाथ ने ऐलान किया कि कांग्रेस पार्टी (Congress) सत्ता में आते ही आदिवासी हित में फैसले लेने के साथ-साथ नौकरियों में आदिवासी वर्ग को प्राथमिकता देने का काम करेगी. कमलनाथ ने कहा है कि कांग्रेस संकल्पित है कि कमजोर वर्ग के लिए काम किया जाए और आदिवासी वर्ग की नई पीढ़ी की आशाओं को पूरा करने के लिए पार्टी लड़ाई लड़ने का काम करेगी.

वर्चुअल मीटिंग में मौजूद कांग्रेस के आदिवासी विधायकों ने भी कमलनाथ के नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया. साथ ही पूर्व की सरकार में लिए गए फैसलों को आदिवासी हित में लिए गए फैसले करार दिया. वर्चुअल मीटिंग में कांग्रेस पार्टी के कई आदिवासी विधायक शामिल हुए. वहीं कई अन्य विधायक भी मीटिंग का हिस्सा बने. मीटिंग में बाला बच्चन, सुरेंद्र सिंह बघेल, कांतिलाल भूरिया, अशोक मर्सकोले, झूमा सोलंकी, हीरालाल अलावा समेत कई विधायक और आदिवासी नेता शामिल हुए.

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BJP ने किया हमलाइधर,  बीजेपी ने कांग्रेस के अपने को आदिवासी हितेषी बताने पर निशाना साधा है. बीजेपी विधायक कृष्णा गौर ने कांग्रेस के आदिवासी हित में लड़ाई लड़ने को अवसरवादी करार दिया है. बीजेपी विधायक के मुताबिक कांग्रेस को उपचुनाव के कारण आदिवासी वर्ग की चिंता हो रही है और यह पार्टी अब पूरी तरीके से अवसरवादी पार्टी में तब्दील हो चुकी है. उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए वन अधिकार कानून पट्टे समेत दूसरे मामलों को लेकर फैसले नहीं करने वाली पार्टी आज खुद को आदिवासी हितेषी पार्टी बताने में जुटी है.

बैठक के पीछे की सियासत

दरअसल प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है. बुरहानपुर की नेपानगर, अनूपपुर, गुना की बमोरी, धार की बदनावर, गुना की मुंगावली, समेत कई सीटों पर आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में हैं. ऐसे में कांग्रेसका यह दांव उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. पिछली कमलनाथ सरकार ने 9 अगस्त को आदिवासी दिवस पर अवकाश का ऐलान किया था. यही कारण है कि अब कांग्रेस पार्टी पिछली सरकार में हुए फैसलों के जरिए उपचुनाव से पहले आदिवासी वोटों को साधने की कोशिश में है. पार्टी ने आदिवासी वोटरों को साधने के लिए अपने आदिवासी विधायकों को एकजुट रखते हुए उपचुनाव में बड़ी जिम्मेदारी देने और पिछली सरकार के फैसलों को जानकारी जनता तक पहुंचाने का जिम्मा सौंपा है.




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