मध्य प्रदेश

‘आत्म निर्भर एमपी’ के लिए 4 दिन हुआ मंथन : मालवा की मिर्च-मूंग और चंबल की गजक नये सिरे से होगी-ब्रांडिंग

भोपाल.आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश (madhya pradesh) का रोडमैप (road map) तैयार करने के लिए भोपाल में हुई वेबिनार सीरीज का मंगलवार को समापन हो गया.4 दिन चली इस वेबिनार सीरीज में कई जानी-मानी राजनीतिक शख्सियतें, एक्सपर्ट, मंत्री और अधिकारी शामिल हुए.इसके चौथे और आखिरी दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, हर व्यक्ति को उसकी योग्यता के मुताबिक रोजगार मिले और वो इतना सक्षम बन जाए कि एक दिन खुद रोजगार देने की स्थिति में आ जाए. इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में एकीकृत जॉब पोर्टल तैयार किया जाएगा. इसका लाभ जरूरतमंदों को दिलवाने में मिलेगा. इससे युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में अपने हुनर से रोजगार दिलवाना आसान होगा. मध्यप्रदेश में जब कोरोना काल में रोजगार सेतु पोर्टल के माध्यम से स्किल मेपिंग की गई तो अनेक हुनरमंद सामने आए. इनकी संख्या सात लाख से अधिक थी. इन्हें रोजगार उपलब्ध कराया गया. मध्यप्रदेश में स्टार्टअप से लेकर एमएसएमई क्षेत्र तक प्रतिभा को अवसर देकर आगे बढ़ाया जाएगा. उन्हें हताश नहीं होने दिया जाएगा. गांवों को आर्थिक रूप से को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रयास बढ़ाए जाएंगे.

पूर्व वित्त मंत्री जयंत सिन्हा शामिल
पूर्व वित्त एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा भी वेबिनार में शामिल हुए.उन्होंने कहा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए वेबिनार का आयोजन अहम है. आत्मनिर्भरता का अर्थ है अपने भाग्य को खुद निर्मित करना. मध्यप्रदेश ने कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में काफी अच्छा काम किया है. झारखंड जैसे राज्य मध्यप्रदेश से प्रेरणा ले सकते हैं. सिन्हा ने कहा देश की नई उद्योग नीति का निर्माण हो रहा है. इसमें खाद्‌य प्रसंस्करण उद्योग के विकास पर विशेष ध्यान देना होगा. मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में अच्छे परिणाम ला सकता है. आर्थिक क्षेत्र में विभिन्न प्रतिष्ठानों को सक्षम बनाने, स्टार्टअप गतिविधियों के विकास, पर्यावरण हितैषी स्थाई विकास के प्रयास प्रगति की तरफ ले जाने में सहायक हैं. मध्यप्रदेश की स्थिति ऐसी है जो आत्मनिर्भरता में सफलता हासिल करने में मददगार है.उद्योग क्षेत्र को बढ़ावा

वेबिनार को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा मध्यप्रदेश में लघु और कुटीर उद्योगों का जाल बिछाने का प्रयास किया जाए. बड़े उद्योग भी आएं, पहले ऐसे प्रयास किए गए हैं. इनमें सफलता भी मिली. कई बड़े उद्योग मध्यप्रदेश में स्थापित हुए हैं जिनसे अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन आया है. प्रधानमंत्री मोदी आत्मनिर्भर भारत के लिए जो प्रयास कर रहे हैं, मध्यप्रदेश उस पर तेजी से कार्य करेगा.

कृषि क्षेत्र पर फोकस
वेबिनार के दौरान सीएम ने कहा कि सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन से अर्थव्यवस्था का सुधार होता है. इसके साथ ही अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कृषि का विशेष योगदान है. मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से निकालकर इस योग्य बनाया गया कि कई वर्ष विकास दर बीस प्रतिशत तक रही. करीब 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई संभव हो सकी. बंपर कृषि उत्पादन की उपलब्धि मध्यप्रदेश ने हासिल की. कृषि अधोसंरचना को मजबूत बनाने और वेल्यू एडिशन के प्रयासों से किसानों को सीधा लाभ मिला है. मंडी अधिनियम में संशोधन से किसानों को वन नेशन, वन मार्केट की सुविधा मिली.इस तरह के प्रयास जारी रहेंगे.

महिला स्व-सहायता समूहों को ताकत

कोरोना काल में प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों ने बेहतर कार्य किया है. इन समूहों की ताकत यह है कि इसकी सदस्य मिलकर कार्य करती हैं. मध्यप्रदेश में पीपीई किट यूनिफार्म और मॉस्क तैयार करने में यह समूह जुट गए. यही नहीं पोषण आहार बनाने का काम भी महिला समूह कर रहे हैं. प्रदेश के एक महिला स्व-सहायता समूह ने मुर्गी पालन से तीन सौ करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर की उपलब्धि हासिल की. ऐसे समूहों को मार्केटिंग और पैकेजिंग के साथ ही बैकिंग सुविधाएं प्रदान कर हर संभव सहयोग दिया जा रहा है.

प्रदेश के सामान की ब्रांडिंग
वेबिनार में लोकल को वोकल बनाने पर चर्चा करते हुए बताया गया कि मध्यप्रदेश में निमाड़ में मिर्च, मूंग और कपास, चंबल में सरसों और गजक, शाजापुर-आगर मालवा, मंदसौर और बैतूल के संतरा उत्पादन, बुरहानपुर में केला उत्पादन, मंदसौर और नीमच में लहसुन उत्पादन की विशेषताएं हैं. इनका विशेष ब्रांड बनाने से लेकर लघु औद्योगिक इकाईयों की शुरुआत का विचार साकार किया जा सकता है. चंदेरी, महेश्वर और धार के बाग प्रिंट और वस्त्र निर्माण की खूबियों को दुनिया तक पहुंचाया जाए




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