मध्य प्रदेश

अयोध्या में भूमि पूजन स्थल की रायसेन के फूलों ने बढ़ाई थी शोभा, भगवान राम से जिले का है खास कनेक्शन

5 अगस्त को पीएम मोदी के हाथों अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर भूमि पूजन संपन्न हुआ

पॉलीफार्म के मालिक मुदित शेजवार ने कहा कि ये सौभाग्य की बात है कि 500 वर्षो के संघर्ष के बाद शुरू हुए मंदिर (Ram Mandir) निर्माणकार्य में रायसेन (Raisen) जिले का भी छोटा सा योगदान रहा.

रायसेन. अयोध्या (Ayodhya) में भगवान राम की जन्मस्थली पर मंदिर निर्माण (Ram Mandir) के लिए हुए भूमि पूजन में एमपी के रायसेन (Raisen) का नाम भी अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा है. भूमि पूजन के लिए तैयार किए गए स्थल को रायसेन के फूलों (Flowers) से ही सजाया गया था. रायसेन के पास ग्राम बिलारा स्थित अनन्या पॉलीफार्म में पैदा हो रहे आर्किड फूलों ने ही पूजा स्थल की शोभा बढ़ाई थी. अनन्या पॉलीफार्म के मालिक मुदित शेजवार ने बताया कि उनके फूल देश के 12 शहरों में जाते हैं. उनमें से एक यूपी की राजधानी लखनऊ भी है.

पॉलीफार्म के मालिक मुदित शेजवार को भूमि पूजन कार्यक्रम के वक्त उनके लखनऊ बेंडर का कॉल आया. और कहा गया कि आप कार्यक्रम देख रहे हैं. सजावट में आपका फूल ही लगा हुआ है. इस बात को सुनते हुए मुदित की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. और उसने सब को कॉल कर इसकी जानकरी दी.

बतौर मुदित ये सौभाग्य की बात है कि 500 वर्षो के संघर्ष के बाद शुरू हुए मंदिर निर्माणकार्य में रायसेन जिले का भी छोटा सा योगदान रहा.

10 एकड़ में है पॉलीफार्मराहुल कामले, प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया रायसेन में 10 एकड़ में बने अनन्या पॉलीफार्म में आर्किड के अलावा जवेरा, जिप्सोफिला सहित अन्य कई तरह के फूलों की खेती होती है. पूर्व मंत्री डा. गौरीशंकर शेजवार के पुत्र मुदित शेजवार का पॉलीफार्म है. आर्किड मूलत: थाइलेंड का फूल है. पांच साल पहले उन्होंने देश में पहली बार इसकी खेती शुरू की थी. देश में आर्किड फूल की मांग की पूर्ति रायसेन से होती है. एयरोपोनिक पद्धति से इस फूल की खेती की जाती है. जिसमें पौधे की जड़ें हवा में रहती हैं. नारियल की नट्टी में इस पौधे को उगाया जाता है. जिससे जड़ें हवा में लटकती रहती हैं.

रायसेन में भगवान राम ने बिताये चातुर्मास

पॉलीफार्म के पास ही वनगमन के समय भगवान राम ने चातुर्मास बिताए थे. कहा जाता है विदिशा बेतवा तट पर भगवान राम पहुंचे थे. पग-पग बेतवा पार किया था. इसलिए नदी का नाम पग्नेश रखा गया. राम के साथ माता सीता और लक्ष्मण भी रायसेन पहुंचे थे. जब बारिश शुरू हो गई, तो भगवान राम ने एक पहाड़ी को चुना और वहां छतरीनुमा एक चट्टान के नीचे ठहरे. और चातुर्मास बिताया. यह स्थान राम छज्जा के नाम प्रचलित है. वहां से कुछ ही दूर पहाड़ पर एक छोटा तालाब है, जिसे सीता तलाई के नाम से जाना जाता है. यहां माता सीता स्नान करती थीं. (रिपोर्ट- देवराज दुबे)




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