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अमेरिकी सांसद की अपील, भारत की तरह यहां भी मिले अफगान सिखों और हिंदू शर्णार्थियों को दर्जा

प्रतीकात्मक तस्वीर.

अमेरिकी सांसद जिम कोस्टा ने एक ट्वीट में कहा कि यह आतंकवादियों के हाथों आसन्न बर्बादी से अफगानिस्तान (Afghanistan) के हिंदुओं और सिखों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

वॉशिंगटन. अमेरिका के एक प्रभावशाली सांसद अनुराग श्रीवास्तव ने अफगानिस्तान के सिखों और हिंदुओं (Afghan Sikhs and Hindus) को शरणार्थी का दर्जा देने के लिए भारत की प्रशंसा की. साथ ही ट्रंप प्रशासन से इस युद्धग्रस्त देश के सताए धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भारत जैसी ही व्यवस्था करने की अपील की है. दरअसल, विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा था कि अफगानिस्तान (Afghanistan) में बाहरी समर्थकों के इशारे पर आतंकवादियों द्वारा हाल में हिंदुओं और सिखों के खिलाफ हमले बढ़ गए हैं और भारत इन समुदायों के उन सदस्यों को जरूरी वीजा उपलब्ध करा रहा है जो वहां से आना चाहते हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘हमें इन समुदायों के सदस्यों से अनुरोध प्राप्त हो रहे हैं. वे भारत आना चाहते हैं, यहां रहना चाहते हैं और कोविड की मौजूदा स्थिति के बावजूद, हम उनके अनुरोधों को पूरा कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि जो लोग भारत आकर बसना चाहते हैं, उनके देश पहुंचने के बाद, उनके अनुरोधों को जांचा जाएगा और मौजूदा नियमों और नीतियों के आधार पर उनपर काम किया जाएगा. भारत के इस कदम पर प्रतिक्रिया करते हुए, अमेरिकी सांसद जिम कोस्टा ने एक ट्वीट में कहा, ‘यह आतंकवादियों के हाथों आसन्न बर्बादी से अफगानिस्तान के हिंदुओं और सिखों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.’ उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि भारत ने उन्हें शरण दी है लेकिन लंबे वक्त तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और किए जाने की जरूरत है. मैं अधिक स्थायी समाधानों की वकालत करना जारी रखूंगा जो इन परिवारों को सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और उज्ज्वल भविष्य दे.’ अप्रैल में, सांसद ने विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ को पत्र लिख कर अफगानिस्तान के हिंदुओं और सिखों के लिए इसी तरह का शरणार्थी दर्जा मांगा था.

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हिंदू और सिखों को मिले था सरकार में ऊंचे ओहदेन्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अफगानिस्तान में हिंदू और सिखों की संख्या अगर लाखों में न सही, कभी हजारों में थी. उनके कारोबार पूरी तरह स्थापित थे और उन्हें सरकार में ऊंचे ओहदे मिले हुए थे. लेकिन दशकों से चले आ रहे युद्ध और प्रताड़ना के कारण लगभग सभी भाग कर भारत, यूरोप या उत्तर अमेरिका चले गए.




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