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अमेरिका के मानवरहित ड्रोन के निर्यात में ढील से भारत को होगा फायदा, ये हैं खूबियां

अमेरिका ने मानवरहित ड्रोन के निर्यात में ढील दे दी है.(सांकेतिक फोटो)

अमेरिक के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मानवरहित ड्रोन (unmanned aerial vehicles)के निर्यात पर प्रतिबंधों (Ban on Export Restriction) को लेकर कुछ संशोधन किए हैं.

वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मानवरहित ड्रोन (unmanned aerial vehicles) के निर्यात पर प्रतिबंधों (Ban on Export Restriction) को लेकर कुछ संशोधन किए हैं. इन नियमों में बदलाव के तहत अब 800 किलोमीटर प्रति घंटे के रफ्तार यूएनवी तक पर ढील दी है. इन नियमों के तहत न सिर्फ मध्य पूर्व में बल्कि उसके सहयोगियों को लीबिया में चीनी लड़ाके ड्रोन्स का मुकाबला करने में मदद मिलेगी. जाहिर है अससे भारत को भी प्रीडेटर-बी आर्म्ड और ग्लोबल हॉक सर्विलांस ड्रोन्स अमेरिका से खरीदने में मददगार साबित होगा. इन दोनों की स्पीड 800 किलोमीटर प्रति घंटे से कम है. इस ड्रोन की क्षमता ये है कि वह एक हजार किलोग्राम तक बम या एयर टू सर्फेस मिसाइल को लेकर चल सकता है.

यूएएस की गति भी 800 किलोमीटर प्रति घंटे से कम

व्हाइस हाउस की तरफ से जारी बयान में यह कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय विवेक के आह्वान पर फैसला लेते हुए मिसाइल टैक्नोलॉजी रिजीम कैटगरी-1 अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (यूएएस) जिनकी गति 800 किलोमीटर प्रति घंटे से कम की रफ्तार है उन्हें कैटगरी-2 मानने का फैसला किया है. इससे हमारे साझीदारों की क्षमता को बढ़ेगी और यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा में मददगार होगा और यूएवी बाजार के दायरे को बढ़ाने से हमारी आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी।

चीन ने पाकिस्तान, यमन और लीबिया को ड्रोन दिएट्रंप ने कहा कि नीति को बदलने का मतलब है 800 किलोमीटर प्रति घंटे से कम के रफ्तार वाले यूएवी पर मिसाइल टैक्नोलॉजी कंट्रोल रिजिम (एमटीसीआर) यूएसए क्लाउज के तहत रोक नहीं रहेगी. एक तरफ जहां अमेरिकी रक्षा कंट्रैक्टर को एमटीसीआर यूएसए क्लाउज के तहत प्रतिबंध लगा हुआ था तो वहीं दूसरी तरफ चीन की तरफ से पाकिस्तान, यमन और लीबिया में सिविल वॉर के समय इस्तेमाल के लिए विंग लूंग आर्म्ड ड्रोन दिए गए.

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खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन पहले ही सीपीईसी और ग्वादर पोर्ट की सुरक्षा के लिए चार विंग लूंग आर्म्ड ड्रोन सप्लाई कर चुका है. न ही चीन और न ही पाकिस्तान एमटीसीआर का सदस्य है, इसलिए बीजिंग को इस्लामाबाद को एक्सपोर्ट पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है.




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